लंदन। मिस्र के पुरातत्वविदों ने लक्सर के कार्णक मंदिर के पास लगभग 3500 साल पुराने एक मकबरे का द्वार ढूंढ निकालने का दावा किया है।
मिस्र के संस्कृति मंत्री के अनुसार, लाल ग्रेनाइट से बना यह द्वार आत्माओं को नई यात्रा पर ले जाने के लिए बना था। यह मकबरा ईसा से 15वीं सदी पूर्व के शक्तिशाली रानी हैशेपसूट के जमाने का है। मंत्रालय ने कहा कि कार्णक मंदिर के पास मिला यह द्वार 1.75 मीटर ऊंचा तथा एक मीटर चौड़ा है और इस पर धार्मिक पंक्तियां उत्कीर्ण हैं।
मीडिया की खबरों के अनुसार, मिस्र के उत्खनन मिशन के प्रमुख मंसौर बोरैक ने कहा कि इस द्वार को रोम साम्राज्य के दौरान मकबरे से हटाकर बाद में दोबारा एक इमारत की दीवार पर लगाया गया था।
Monday, April 12, 2010
बहादुरी की मिसाल है यह बच्ची
बीजिंग। तीन साल की उम्र में बच्चे चाकलेट और टाफी की मांग करते हैं, लेकिन चीन के एक चिडि़याघर में तीन साल की बच्ची के कारनामे को देखकर लोग दांतों तले अंगुली दबा लेते हैं।
जियांग्सु राज्य के चेंगझू याचेंग चिडि़याघर में मात्र तीन साल की नट आठ मीटर लंबे तार पर बिना किसी डर के चलती हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस दौरान 130 मीटर ऊंचे तार के नीचे बैठे छह बाघ बैठे रहते हैं। यह बाघ लड़की का शिकार करने के लिए आतुर रहते हैं। इस कारनामे को दिखने के दौरान बच्ची के साथ दो व्यस्क भी तार पर ही साइकिल चलाते हैं। यह उनकी रोजी रोटी का जरिया है। इस निर्मम कृत्य के लिए चिडि़याघर की जमकर आलोचना हो रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान तेज हवा के कारण कभी-कभी बच्ची के कदम लड़खड़ा जाते हैं, लेकिन वह दोनों हाथों को फैलाकर अपना संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ती है। इस दौरान एक बाघ ने उसे लपकने की कोशिश भी की, लेकिन ऊंचाई ज्यादा होने के कारण उसकी कोशिश नाकाम साबित हुई।
चिडि़याघर के प्रवक्ता ने बताया कि उन्होंने जियांग्सी एलाइट चिल्ड्रन आर्ट्स ट्रूप नामक बच्चों के एक पेशेवर समूह को नियुक्त कर रखा है। यह लड़की दुनिया की सबसे कम उम्र की नट है। एक साल की उम्र से ही इसे प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया गया था।
जियांग्सु राज्य के चेंगझू याचेंग चिडि़याघर में मात्र तीन साल की नट आठ मीटर लंबे तार पर बिना किसी डर के चलती हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस दौरान 130 मीटर ऊंचे तार के नीचे बैठे छह बाघ बैठे रहते हैं। यह बाघ लड़की का शिकार करने के लिए आतुर रहते हैं। इस कारनामे को दिखने के दौरान बच्ची के साथ दो व्यस्क भी तार पर ही साइकिल चलाते हैं। यह उनकी रोजी रोटी का जरिया है। इस निर्मम कृत्य के लिए चिडि़याघर की जमकर आलोचना हो रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान तेज हवा के कारण कभी-कभी बच्ची के कदम लड़खड़ा जाते हैं, लेकिन वह दोनों हाथों को फैलाकर अपना संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ती है। इस दौरान एक बाघ ने उसे लपकने की कोशिश भी की, लेकिन ऊंचाई ज्यादा होने के कारण उसकी कोशिश नाकाम साबित हुई।
चिडि़याघर के प्रवक्ता ने बताया कि उन्होंने जियांग्सी एलाइट चिल्ड्रन आर्ट्स ट्रूप नामक बच्चों के एक पेशेवर समूह को नियुक्त कर रखा है। यह लड़की दुनिया की सबसे कम उम्र की नट है। एक साल की उम्र से ही इसे प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया गया था।
उड़ीसा में है संस्कृत विद्वानों का एक गांव
केंद्रपाड़ा [उड़ीसा]। संस्कृत भाषा बेशक आम प्रचलन से हट गई हो लेकिन उड़ीसा के तटवर्ती जिले में एक गांव ऐसा भी है जिसके हर घर में इस प्राचीन भाषा का एक न एक जानकार पंडित मिल जाएगा।
श्यामसुंदर ग्राम पंचायत के ससना गांव में ज्यादातर ब्राह्मण परिवार रहते हैं। गांव में लगभग 32 परिवार हैं जिनमें 200 सदस्य हैं। इन सभी परिवारों की विशेषता यह है कि हर परिवार में एक न एक संस्कृत का विद्वान है। ये यहां चल रहे सरकारी संस्कृत माध्यम के शैक्षिक संस्थानों में शिक्षा देने का काम कर रहे हें।
हाल में संस्कृत अध्यापक के पद से अवकाश ग्रहण करने वाले 76 वर्षीय वैष्णव चरण पति ने कहा कि हमें संस्कृत के संरक्षक होने का गौरव हासिल है। यह प्राचीन भाषा हमारे गांव में पूरी तरह जीवित है। पति ने कहा कि उनके गांव में अगली कई पीढि़यों तक के लिए यह सुनिश्चित कर दिया गया है कि हर परिवार का कम से कम एक बच्चा संस्कृत माध्यम से शिक्षा ग्रहण करेगा।
उन्होंने बताया कि संस्कृत माध्यम से शिक्षा पाने वाले ज्यादातर लोगों को सरकारी स्कूलों में रोजगार मिल जाता है अन्यथा वे पंडित का काम करने लगते हैं और हिंदू परिवारों में होने वाले धार्मिक आयोजन संपन्न कराते हैं।
ऐसे ही एक व्यक्ति हैं पंडित त्रिलोचन सदंगी। उनके दोनों पुत्र और पुत्रियों ने संस्कृत माध्यम से शिक्षा हासिल की है और वे सरकारी स्कूलों में संस्कृत पढ़ा रहे हैं। पति ने बताया कि अपने बच्चों को संस्कृत पढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर हम इस भाषा को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहे हैं। अभी तक हमें इसमें काफी सफलता मिली है और हमें पूरी उम्मीद है कि हमारी भावी पीढि़यां इस परंपरा को जीवित रखेंगी।
यह गांव बबकारपुर के पड़ोस में है जिसमें अभिज्ञान शाकुंतलम और ऐसे ही अन्य कई महाकाव्यों के लेखक महाकवि कालिदास की स्मृति में एक छोटा सा मंदिर बना हुआ है। इससे इस क्षेत्र के संस्कृत भाषा के प्रति पे्रम का संकेत मिलता है
श्यामसुंदर ग्राम पंचायत के ससना गांव में ज्यादातर ब्राह्मण परिवार रहते हैं। गांव में लगभग 32 परिवार हैं जिनमें 200 सदस्य हैं। इन सभी परिवारों की विशेषता यह है कि हर परिवार में एक न एक संस्कृत का विद्वान है। ये यहां चल रहे सरकारी संस्कृत माध्यम के शैक्षिक संस्थानों में शिक्षा देने का काम कर रहे हें।
हाल में संस्कृत अध्यापक के पद से अवकाश ग्रहण करने वाले 76 वर्षीय वैष्णव चरण पति ने कहा कि हमें संस्कृत के संरक्षक होने का गौरव हासिल है। यह प्राचीन भाषा हमारे गांव में पूरी तरह जीवित है। पति ने कहा कि उनके गांव में अगली कई पीढि़यों तक के लिए यह सुनिश्चित कर दिया गया है कि हर परिवार का कम से कम एक बच्चा संस्कृत माध्यम से शिक्षा ग्रहण करेगा।
उन्होंने बताया कि संस्कृत माध्यम से शिक्षा पाने वाले ज्यादातर लोगों को सरकारी स्कूलों में रोजगार मिल जाता है अन्यथा वे पंडित का काम करने लगते हैं और हिंदू परिवारों में होने वाले धार्मिक आयोजन संपन्न कराते हैं।
ऐसे ही एक व्यक्ति हैं पंडित त्रिलोचन सदंगी। उनके दोनों पुत्र और पुत्रियों ने संस्कृत माध्यम से शिक्षा हासिल की है और वे सरकारी स्कूलों में संस्कृत पढ़ा रहे हैं। पति ने बताया कि अपने बच्चों को संस्कृत पढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर हम इस भाषा को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहे हैं। अभी तक हमें इसमें काफी सफलता मिली है और हमें पूरी उम्मीद है कि हमारी भावी पीढि़यां इस परंपरा को जीवित रखेंगी।
यह गांव बबकारपुर के पड़ोस में है जिसमें अभिज्ञान शाकुंतलम और ऐसे ही अन्य कई महाकाव्यों के लेखक महाकवि कालिदास की स्मृति में एक छोटा सा मंदिर बना हुआ है। इससे इस क्षेत्र के संस्कृत भाषा के प्रति पे्रम का संकेत मिलता है
हर रात होता है भूत का तमाशा
ब्रिटेन के एक मैकेनिक ने दावा किया है कि उसके गैराज में भूत का वास है। उसका कहना है कि यह भूत रात में गैराज के कर्मचारियों पर पत्थर और सिक्के फेंकता है। दक्षिण यार्कशायर के डोनकास्टर में रहने वाले निक ह्वाइट नाम के इस शख्स के अनुसार, उसका गैराज किसी जमाने में चर्च था और द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान इसे शवगृह के रूप में इस्तेमाल किया गया था।
ह्वाइट का कहना है रात में भूत गैराज में आकर टायरों के ढेर पर मंडराता है। ह्वाइट को गैराज में द्वितीय विश्व युद्ध से पहले के दो सिक्के भी मिले हैं। उसका कहना है कि भूत ने ही ये सिक्के फेंके हैं। इस साल फरवरी में एक दिन ह्वाइट को 1936 का एक सिक्का मिला था। उस पर जार्ज पंचम की तस्वीर छपी थी। फिर पिछले हफ्ते 1938 का एक तांबे का सिक्का मिला।
ह्वाइट ने बताया कि मैंने जब यह घर खरीदा था, तो इस जगह के बारे में फैली अफवाहों को अंधविश्वास समझकर अनदेखा कर दिया था, लेकिन अब मैं मान गया हूं कि वो बातें गलत नहीं थी। ह्वाइट के अनुसार गैराज के पूर्व मालिक ने तांत्रिक को बुलाकर झाड़-फूंक कराई थी। परंतु लगता है कि उसका भूत पर कोई असर नहीं हुआ।
ह्वाइट का कहना है रात में भूत गैराज में आकर टायरों के ढेर पर मंडराता है। ह्वाइट को गैराज में द्वितीय विश्व युद्ध से पहले के दो सिक्के भी मिले हैं। उसका कहना है कि भूत ने ही ये सिक्के फेंके हैं। इस साल फरवरी में एक दिन ह्वाइट को 1936 का एक सिक्का मिला था। उस पर जार्ज पंचम की तस्वीर छपी थी। फिर पिछले हफ्ते 1938 का एक तांबे का सिक्का मिला।
ह्वाइट ने बताया कि मैंने जब यह घर खरीदा था, तो इस जगह के बारे में फैली अफवाहों को अंधविश्वास समझकर अनदेखा कर दिया था, लेकिन अब मैं मान गया हूं कि वो बातें गलत नहीं थी। ह्वाइट के अनुसार गैराज के पूर्व मालिक ने तांत्रिक को बुलाकर झाड़-फूंक कराई थी। परंतु लगता है कि उसका भूत पर कोई असर नहीं हुआ।
लव के पीछे है केमिकल लोचा

आखिर 'लव' में ऐसा क्या है जो इसे दुनिया की सबसे बड़ी मिस्ट्री माना गया है। अपने प्रेमी के लिए ललक ऐसी चीज है, जिसने वैज्ञानिकों को भी लम्बे वक्त तक हैरान किया है। प्यार करने वालों के बीच इस पागलपन का कारण जानने के लिए जाने कितनी खोजें हुई। अगर उन खोजों पर यकीन करें तो दो प्रेमियों की इमोशंस और उनके चेंज होने के पीछे जो असली कारण है, वह है शरीर में होने वाला केमिकल लोचा।
वैज्ञानिकों के अनुसार प्यार की अलग-अलग स्टेजेस जैसे इन्फैचुएशन, कडलिंग, अट्रैक्शन यहां तक कि बिट्रेयल के पीछे भी काम करते हैं कुछ खास केमिकल्स।
वैज्ञानिक मानते हैं कि आकर्षण असल में इन न्यूरोकेमिकल्स के वर्चुअल एक्सप्लोजन जैसा है। जिसके बाद आपको फील गुड होने लगता है। पीईए, एक केमिकल है जो नर्व सेल्स के बीच इन्फॉर्मेशन का फ्लो बढ़ा देता है। इस केमिस्ट्री में डोपामाइन और नोरिफिनेराइन नामक दो केमिकल्स भी बड़ा इंट्रेस्टिंग काम करते हैं। डोपामाइन हमें फील गुड का अहसास कराता है और नोरिफिनेराइन एड्रिनैलिन का प्रोडक्शन बढ़ा देता है। किसी को देखकर बढ़ने वाली हार्ट बीट इन कैमिकल्स की ही देन है, जिसे प्रेमी कुछ कुछ होना समझ बैठते हैं। ये तीनों कैमिकल्स कम्बाइन होकर काम करते हैं। इन्फैचुएशन जिसे इन जनरल लोग आपकी 'केमिस्ट्री' कहते हैं। यही कारण है कि नए प्रेमी खुद को हवा में उड़ता हुआ, बेहद ऊर्जावान सा फील करते हैं।
किसी के साथ कडल अप करने का मन बस यूं ही नहीं होता। इसके पीछे भी एक केमिकल है जनाब! ये है ऑक्सिटोसिन, जिसे कडलिंग केमिकल भी कहा गया है। वैसे तो ऑक्सिटोसिन को मदरहुड से भी संबंध किया जाता है लेकिन ये भी माना जाता है कि ये महिला और पुरूष दोनों को ज्यादा कूल और दूसरों की फीलिंग्स के लिए सेंसिटिव बनाता है। सेक्सुअल अराउजल में भी इसका खास रोल है। ऑक्सिटोसिन प्रोडक्शन ट्रिगर करने के पीछे इमोशनल रीजंस भी हो सकते हैं और फिजिकल भी। यानी अपने लवर की फोटो देखने, उसके बारे में सोचने से लेकर उसकी आवाज सुनने, उसके किसी खास अपीयरेंस तक कुछ भी आपकी बॉडी में ऑक्सिटोसिन का प्रोडक्शन बढ़ा सकता है। अगर प्रेमी फिजिकली प्रेजेंट हैं तो यही हार्मोन एक-दूसरे को गले लगाने और कडल करने के लिए उकसाता है।
इन्फैचुएशन कम होते ही केमिकल्स का एक नया ग्रुप टेकओवर कर लेता है। इसे क्रिएट करते हैं एन्डॉर्फिन्स। ये केमिकल्स पीईए जैसे एक्साइटिंग नहीं होते लेकिन ज्यादा एडिक्टिव और कूल करने वाले होते हैं। यही कारण है कि इन्फैचुएशन के बाद प्यार की अगली स्टेज यानी अटैचमेंट में इंटिमेसी के साथ-साथ ट्रस्ट, वॉर्म्थ और साथ वक्त बिताने जैसी इमोशंस फील की जाती हैं। जितना ज्यादा लोग इन केमिकल्स के आदी हो जाएं वो उतना ही इनसे दूर नहीं रह सकते। यही कारण है कि लम्बे चलने वाले लव अफेयर्स या कोई खास रिश्ता टूटना आप बर्दाश्त नहीं कर पाते। इसके पीछे रीजन है इन केमिकल्स का लत लगना। अपने पार्टनर के दूर जाने पर उसे मिस करने के पीछे भी यही एंडॉर्फिन्स होते हैं।
प्रेमी के दूर जाने पर ये केमिकल्स बॉडी में कम होने लगते हैं और इनके आदी होने की वजह से आप अपने प्रेमी, या विज्ञान की भाषा में कहें तो इन हारमोन्स की कमी महसूस करने लगते हैं।
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